हरतालिका तीज व्रत 2025: कथा, महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

हरतालिका तीज व्रत 2025 पर जानें पूजा विधि, कथा, महत्व और शुभ मुहूर्त। सुहागिन और कुंवारी कन्याओं के लिए यह व्रत अत्यंत शुभ माना जाता है।

हरतालिका तीज व्रत 2025: महत्व, कथा, पूजन विधि और नियम

भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को सुहागिन महिलाएं और अविवाहित कन्याएं हरतालिका तीज व्रत करती हैं। इस बार व्रत मंगलवार को पड़ रहा है। महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना से यह व्रत निर्जला और निराहार रहकर करती हैं।

शुभ मुहूर्त और पारण

  1. पूजा का शुभ समय – सुबह 5:56 से 8:31 बजे तक

  2. व्रत पारण – अगले दिन बुधवार को सूर्योदय के बाद

व्रत की पौराणिक कथा

मान्यता है कि माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया। कथा के अनुसार, पार्वती की सहेलियों ने उन्हें अगवा कर लिया था ताकि वे तपस्या छोड़ दें, लेकिन माता ने अटल संकल्प से तप पूरा किया और अंततः भगवान शिव को वर रूप में प्राप्त किया। तभी से इस व्रत की परंपरा शुरू हुई।

  • सुहागिन महिलाएं इसे पति की लंबी आयु के लिए करती हैं।

  • अविवाहित कन्याएं योग्य वर की प्राप्ति हेतु व्रत रखती हैं।

पूजन सामग्री

व्रत के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और श्री गणेश की पूजा की जाती है। आवश्यक सामग्री इस प्रकार है:

  1. गीली मिट्टी और रेत से बने शिव-पार्वती के प्रतिरूप

  2. केले के पत्ते, विभिन्न फल-फूल, बेलपत्र, शमी पत्र

  3. धतूरा, आंक का फूल, मंजरी

  4. जनेऊ, नाड़ा, वस्त्र

  5. माता गौरी के लिए श्रृंगार सामग्री

  6. दीपक, कपूर, चंदन, सिंदूर, कुमकुम

  7. कलश और पंचामृत

व्रत के नियम

  1. यह व्रत पूरी तरह निर्जला और निराहार होता है।

  2. सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक अन्न और जल का सेवन वर्जित है।

  3. इस व्रत को एक बार शुरू करने के बाद जीवनभर करना आवश्यक माना गया है।

  4. महिलाएं रात्रि में जागरण कर शिव-पार्वती का भजन-कीर्तन करती हैं।

धार्मिक माहौल और बाजार की रौनक

व्रत से पहले ही गंगा घाटों पर महिलाओं की भीड़ रही। महिलाएं गंगा स्नान कर गंगाजल घर लेकर आईं। बाजारों में भी रौनक रही—

  • डलिया और पकवान सामग्री की खरीदारी

  • श्रृंगार और कपड़ों की दुकानों पर भीड़

  • पूजा सामग्री की जमकर बिक्री

निष्कर्ष

हरतालिका तीज का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि यह भक्ति, समर्पण और अटल संकल्प का प्रतीक है। शिव-पार्वती की पूजा से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और अविवाहित कन्याओं को योग्य वर की प्राप्ति होती है।
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